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सेल्फ़ इनवॉइस › सेल्फ़ इनवॉइस कब ज़रूरी है

सेल्फ़ इनवॉइस कब बनाना होता है?

आमतौर पर बेचने वाला GST लगाता है और भरता है। रिवर्स चार्ज में यह खरीदार भरता है। जब ऐसा हो और सप्लायर रजिस्टर्ड न हो, तो कोई सही टैक्स इनवॉइस नहीं होता, इसलिए सेल्फ़ इनवॉइस चाहिए।

नियम एक लाइन में

CGST Act का Section 31(3)(f): जो रजिस्टर्ड व्यक्ति किसी बिना रजिस्ट्रेशन वाले सप्लायर की सप्लाई पर रिवर्स चार्ज में टैक्स भरने के लिए ज़िम्मेदार है, उसे उसका इनवॉइस बनाना होता है। अगर सप्लायर रजिस्टर्ड है, तो उसका अपना इनवॉइस ("रिवर्स चार्ज" लिखा हुआ) इस्तेमाल होता है, और सेल्फ़ इनवॉइस की ज़रूरत नहीं होती।

आम केस

बनाने से पहले जल्दी जाँच

  1. क्या यह सप्लाई रिवर्स चार्ज की लिस्ट में है? अगर नहीं, तो न कुछ भरना है, न सेल्फ़ इनवॉइस बनाना है।
  2. क्या सप्लायर रजिस्टर्ड है? अगर हाँ, तो उससे "रिवर्स चार्ज" लिखा इनवॉइस माँगें।
  3. अगर सप्लायर रजिस्टर्ड नहीं है: सप्लाई मिलने के 30 दिन के अंदर सेल्फ़ इनवॉइस बनाएँ, और पेमेंट करते समय पेमेंट वाउचर।

उदाहरण

एक कंपनी नवंबर में अपने दो नॉन-एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टरों में हर एक को ₹25,000 सिटिंग फ़ीस देती है। डायरेक्टर की सर्विस 18% पर रिवर्स चार्ज में है। कंपनी हर डायरेक्टर का एक सेल्फ़ इनवॉइस (या दोनों की लिस्ट वाला एक) बनाती है, ₹9,000 GST कैश में भरती है, और उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में वापस लेती है।

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